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MP Tribal Protest: Shivraj Singh Chouhan vs Mohan Yadav

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भोपाल। मध्यप्रदेश के सिहोर जिले में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने का मामला अब राजधानी की राजनीति में तूफान बन गया है। पांच दिन के धरने के बाद हजारों आदिवासी गुरुवार को भोपाल की ओर पैदल मार्च पर निकल पड़े। वे मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलकर जमीन के दस्तावेज दिखाना और मुआवजे, पुनर्वास तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करना चाहते हैं।

इस मामले ने भाजपा को असहज स्थिति में डाल दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने सिहोर के कोसमी गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और वन विभाग की कार्रवाई को “जुल्म और अन्याय की हद” बताया। उन्होंने कहा कि जेसीबी मशीनों से घर तोड़े गए और मलबे पर टूटे खपरैल बिखरे पड़े हैं।

चौहान ने आरोप लगाया कि यह उनकी पार्टी को बदनाम करने की साजिश है। उनका कहना था, “हम इन्हीं की वोटों से जीतते हैं और मोहन जी इन्हीं के वोटों से मुख्यमंत्री बने हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों ने उनकी जानकारी के बिना गरीब आदिवासी किसानों की सालों की मेहनत कुचल दी।

मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विवाद को शांत करने के लिए मुख्य सचिव को जांच का आदेश दिया है। यादव ने कहा कि वरिष्ठ नेता ने एक मुद्दा उठाया है और सरकार संवेदनशील है। उनके मुताबिक, “जांच से सच सामने आएगा।”

उधर, वन विभाग का दावा है कि जंगल की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमानुसार की गई। हालांकि, आदिवासी नेता रमेश बारेला का कहना है कि 11 अक्टूबर को तोड़े गए 12 बरेला समुदाय के परिवार वर्षों से वहीं रह रहे हैं। उनके मुताबिक, घरों के साथ फसलें भी नष्ट की गईं और एक कुएं में मिट्टी भर दी गई। परिवारों का दावा है कि उनके पास जमीन के दस्तावेज हैं।

35 गांवों से हजारों लोग, 17 अक्टूबर को भोपाल में प्रदर्शन

आयोजकों के मुताबिक, 35 से अधिक गांवों की महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग इस पैदल मार्च में शामिल हैं। संख्या पांच हजार से दस हजार तक पहुंच सकती है। 17 अक्टूबर को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन करने की योजना है।

वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे भाजपा सरकार के भीतर अंदरूनी मतभेदों का नतीजा बताया है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री बताएं कि कब ठोस कार्रवाई होगी। अब सबकी नजर 17 अक्टूबर के भोपाल प्रदर्शन और जांच रिपोर्ट पर टिकी है।

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स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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