भारतीय नौसेना के लिए गुरुवार को एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई। फ्रांस निर्मित Rafale Marine लड़ाकू विमान ने पहली बार स्वदेशी विमानवाहक पोत INS Vikrant पर सफल लैंडिंग की। Rafale Marine INS Vikrant परीक्षण नौसेना के लिए एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। विमान ने पहली ही कोशिश में डेक पर उतरने में सफलता पाई।
भारतीय नौसेना ने शुक्रवार को इस परीक्षण की जानकारी दी। नौसेना ने कहा कि चल रहे परीक्षण विमान को सेवा में शामिल करने की दिशा में पहला कदम हैं। इससे पहले विमान ने गोवा में INS हंसा स्थित तट-आधारित परीक्षण सुविधा पर भी परीक्षण पूरे किए थे। वहां स्की-जंप से उड़ान और अरेस्टर तार से लैंडिंग का अभ्यास किया गया था।
Rafale Marine INS Vikrant: क्यों है यह परीक्षण खास
INS Vikrant भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत है। इसे कोचीन शिपयार्ड ने बनाया था। पोत को 2 सितंबर 2022 को सेवा में शामिल किया गया था। इसका वजन करीब 45,000 टन है। अभी इस पर रूस निर्मित मिग-29के लड़ाकू विमान तैनात हैं।
राफेल-एम फ्रांसीसी नौसेना के परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत चार्ल्स द गॉल के लिए बनाया गया था। वह पोत कैटापल्ट प्रणाली से विमान उड़ाता है। INS Vikrant में स्की-जंप रैंप और अरेस्टर तार वाली STOBAR प्रणाली है। इसलिए राफेल-एम को इस प्रणाली के हिसाब से ढालना जरूरी है। विमान के 10.9 मीटर चौड़े पंख पोत की 10 मीटर चौड़ी लिफ्ट से बड़े हैं। लिफ्ट में बदलाव का काम भी चल रहा है।
26 राफेल-एम विमानों का सौदा
भारत ने अप्रैल 2025 में फ्रांस से 26 राफेल-एम विमानों का सौदा किया था। इस सौदे की कीमत करीब 63,000 करोड़ रुपये है। इसमें 22 एकल सीट वाले और 4 दोहरी सीट वाले प्रशिक्षण विमान शामिल हैं। इनकी डिलीवरी 2028-29 से शुरू होने की उम्मीद है।
राफेल-एम विमान बाद में INS विक्रमादित्य पर भी तैनात किए जाएंगे। भारतीय वायुसेना के पास पहले से 36 राफेल विमान हैं। 2030 तक भारत के पास कुल 62 राफेल विमान हो जाएंगे। यह उपलब्धि भारत को दोनों तरह के राफेल संचालित करने वाला फ्रांस के बाद पहला देश बना देगी।
INS Vikrant पर उतरने वाला राफेल-एम तीसरा फिक्स्ड-विंग विमान है। इससे पहले 6 फरवरी 2023 को मिग-29के और नौसेना के तेजस विमान ने इस पोत पर लैंडिंग की थी। राफेल-एम की सफल लैंडिंग से नौसेना की समुद्री ताकत और बढ़ेगी।
