Supreme Court firecrackers पर पूर्ण बैन लगाने के पक्ष में नहीं है। गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने यह रुख साफ किया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि हर साल आदेश जारी होते हैं, लेकिन पालन नहीं होता।
पीठ ने कहा कि अदालत के आदेशों का बार-बार उल्लंघन हो रहा है। इसलिए केवल नया आदेश जारी करना काफी नहीं होगा। अदालत का मानना है कि जमीन पर अमल ही असली परीक्षा है। इसीलिए प्रवर्तन पर जोर दिया गया है।
Supreme Court firecrackers पर क्या कहा
अदालत ने कहा कि पूर्ण बैन का व्यापक असर हो सकता है। इसलिए इस तरह के कठोर कदम से बचना चाहिए। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता सार्वजनिक स्वास्थ्य से ऊपर नहीं है। इसलिए नियमों का पालन हर हाल में जरूरी है।
पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार से सख्त प्रवर्तन की उम्मीद जताई। नकली और प्रतिबंधित पटाखे बेचने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसे आदेशों का मजाक नहीं बनने दिया जा सकता। इसलिए जिम्मेदार एजेंसियों को अपनी भूमिका निभानी होगी।
ग्रीन पटाखों पर क्या स्थिति है
सीएसआईआर-नीरी फॉर्मूलेशन वाले प्रमाणित ग्रीन पटाखे अलग श्रेणी में आते हैं। पेट्रोलियम विस्फोटक सुरक्षा संगठन से मंजूर उत्पाद ही बेचे जा सकते हैं। इनकी बिक्री और उपयोग तय समय की खिड़की में ही होगा। इसलिए हर तरह के पटाखे पर एक जैसा नियम लागू नहीं होगा।
बेरियम जैसे प्रतिबंधित रसायन वाले पटाखों पर रोक जारी रहेगी। केंद्र ने बताया कि इस विषय पर आंतरिक विचार-विमर्श चल रहा है। केंद्र ने अपने निष्कर्ष के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा है। अदालत ने इस प्रक्रिया पर भी नजर रखने की बात कही है।
जागरूकता के लिए मशहूर चेहरों का सुझाव
अदालत ने जन जागरूकता के लिए मशहूर चेहरों का सुझाव दिया। इस दौरान क्रिकेटर विराट कोहली का नाम भी सामने आया। हालांकि यह एक सुझाव था, कोई औपचारिक निर्देश नहीं था। अदालत का जोर इस बात पर था कि लोग नियमों को समझें और उनका पालन करें।
पिछले साल अदालत ने सीमित छूट की अनुमति दी थी। तब दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों की सीमित बिक्री हुई थी। बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों से ही हुई थी। ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाई गई थी। वायु, जल और मिट्टी की गुणवत्ता की निगरानी भी हुई थी।
इस मामले में अदालत ने आदेश सुरक्षित रखा है। वायु गुणवत्ता से जुड़ी अन्य अर्जियों पर सुनवाई जारी रहेगी। The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने प्रवर्तन को सबसे बड़ी चुनौती बताया है। हाल में Supreme Court ने डिजिटल अरेस्ट मामलों में भी सख्त रुख दिखाया था।
