CEC Gyanesh Kumar vigilance probe का आदेश केरल सरकार ने दिया है। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला 2006 के एक सड़क प्रोजेक्ट से जुड़ा है। उस समय ज्ञानेश कुमार राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) में सचिव थे। गृह मंत्री ने कहा कि शिकायत की जांच में प्रथम दृष्टया दम पाया गया है।
CEC Gyanesh Kumar Vigilance Probe: क्या है 2006 का मामला
2006 में केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) के तहत अंगामली से तिरुवनंतपुरम तक एमसी रोड के पुनर्निर्माण का काम चल रहा था। यह विश्व बैंक वित्त पोषित 215 करोड़ रुपये की परियोजना थी। इसका काम PATI-BEL नाम के संयुक्त उपक्रम ने लिया था। इस कंपनी से जुड़े मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन ने निर्माण के दौरान कई शिकायतें उठाई थीं। इसके बाद वे मलेशिया लौट गए, जहां नवंबर 2006 में उन्होंने आत्महत्या कर ली। आरोप है कि उनके दो सुसाइड नोट मिले थे, जिनमें ज्ञानेश कुमार का नाम था। केपीसीसी नेता मलयिनकीज्हु वेणुगोपाल ने शनिवार को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप है कि परियोजना के 12-13 करोड़ रुपये के बिल रोक दिए गए थे। साथ ही अवैध वसूली की मांग का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि ये सभी आरोप हैं, जांच में तथ्य सामने आएंगे।
SIR विवाद के बीच आया फैसला
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। चेन्निथला ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन से चर्चा के बाद विजिलेंस निदेशक मनोज अब्राहम को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। 2006 में भी इस मामले में विजिलेंस जांच के आदेश हुए थे, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ पाई थी। इसके बाद कुमार प्रतिनियुक्ति पर रक्षा मंत्रालय चले गए थे। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने भी SIR को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से स्पष्टीकरण की मांग की है।
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