SIR Supreme Court में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के हलफनामे पर जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने यह आदेश दिया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल थे। चुनाव आयोग ने सोमवार देर शाम अपना जवाब दाखिल किया था। यह जवाब 248 पन्नों का है। इसमें आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का बचाव किया है।
आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्त हैं। हलफनामे के अनुसार तीनों सदस्यों ने फैसलों को मंजूरी दी थी। आयोग ने यह भी कहा कि Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। Form 6 मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है। आयोग के अनुसार पुनरीक्षण के तीन आदेश जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी हुए थे। तीनों आदेश सर्वसम्मति से मंजूर हुए थे।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ फैसले दो चुनाव आयुक्तों की जानकारी के बिना लिए गए। यह आरोप 25 सितंबर की एक खबर पर आधारित था। खबर में कहा गया था कि दोनों आयुक्तों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। आयोग ने इस आरोप को खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि फाइल पर दर्ज टिप्पणी या सवाल फैसला नहीं होते। फैसले सभी की राय पर विचार के बाद लिए जाते हैं। आयोग ने यह भी कहा कि हलफनामा भी तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से दाखिल हुआ है।
SIR Supreme Court: Form 6 पर नई याचिका क्या कहती है?
मंगलवार को अदालत ने एक नई याचिका पर भी नोटिस जारी किया। यह याचिका राज्यसभा सांसद डोला सेन ने दाखिल की है। इसमें आरोप है कि बिहार में पुनरीक्षण के दौरान Form 6 में बदलाव किया गया। याचिका के अनुसार यह बदलाव अदालत की मंजूरी के बिना हुआ। आयोग ने इस दावे को भी गलत बताया है। उसका कहना है कि पुनरीक्षण के दौरान जो घोषणा जोड़ी गई थी, वह अलग दस्तावेज है। ऑनलाइन प्रक्रिया में वह Form 6 के साथ दिखने लगी थी। इससे भ्रम पैदा हुआ था। अब प्रक्रिया बदल दी गई है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सभी मुद्दों की जांच की जाएगी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह पेश हुए। उन्हें 10 दिन में जवाब दाखिल करना है। अगली सुनवाई 17 नवंबर के आसपास होने की उम्मीद है। इस मामले पर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। आयोग का कहना है कि अखबार की खबर सबूत नहीं होती। अदालत के फैसले पर ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
सुप्रीम कोर्ट की एक और अहम खबर यहां पढ़ें: DPDP Act पर Supreme Court ने केंद्र को नोटिस जारी किया। सुनवाई का पूरा विवरण यहां देखें: ETV Bharat report।
