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MP अस्पताल पेपरलेस: MY Hospital में पहले दिन 1,537 OPD

Dainik R Times
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MP अस्पताल पेपरलेस व्यवस्था 1 नवंबर से मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में शुरू हो गई है। अब मरीजों को ओपीडी पर्ची, जांच रिपोर्ट और इलाज का ब्योरा कागज पर नहीं, बल्कि डिजिटल रूप में मिलेगा। इंदौर के महाराजा यशवंतराव (MY) अस्पताल में पहले ही दिन 1,537 मरीजों का डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन हुआ। यह पहल मध्य प्रदेश के 71वें स्थापना दिवस पर शुरू हुई है।

इंदौर में पहले दिन 1,771 डिजिटल रजिस्ट्रेशन

एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में शनिवार को अस्पताल सूचना प्रबंधन प्रणाली (HIMS) की ओपीडी सेवा शुरू हुई। एमवाई अस्पताल में 1,537 मरीजों के साथ एमटीएच अस्पताल में 234 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ। इस तरह पहले दिन कुल 1,771 मरीज डिजिटल व्यवस्था से जुड़े। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में भी यह सेवा शुरू हुई। स्टेट कैंसर अस्पताल और एमआरटीबी अस्पताल में भी डिजिटल ओपीडी शुरू हो गई है।

MP अस्पताल पेपरलेस: मरीजों को क्या फायदा मिलेगा

नई व्यवस्था में मरीज का रजिस्ट्रेशन, जांच और इलाज का पूरा ब्योरा एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहेगा। डॉक्टर अगली बार मरीज का पुराना रिकॉर्ड तुरंत देख सकेंगे। इससे बार-बार जांच कराने की जरूरत कम होगी और समय भी बचेगा। ओपीडी पर्ची मरीज के मोबाइल पर एसएमएस या डिजिटल रूप में पहुंचेगी।

300 करोड़ की परियोजना, अभी आधी राह बाकी

यह बदलाव राज्य सरकार की 300 करोड़ रुपये की HIMS परियोजना का हिस्सा है। इसका लक्ष्य प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों को एक डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है। हालांकि पूरी तरह पेपरलेस होने में अभी समय लगेगा। वार्डों में कंप्यूटर और टैबलेट की कमी है। इसलिए इनपेशेंट विभाग (IPD) की डिजिटल सेवा अभी शुरू नहीं हो पाई है। अगस्त से ओपीडी सेवा का ट्रायल चल रहा था। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में यह व्यवस्था पिछले छह महीने से पायलट तौर पर चल रही थी। वहां तीन विभागों में इसे आजमाया गया था।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि धीरे-धीरे सभी विभागों में यह व्यवस्था लागू होगी। मरीजों के रिकॉर्ड आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) से भी जुड़ेंगे। इससे प्रदेश भर में इलाज का डिजिटल रिकॉर्ड एक जगह उपलब्ध रहेगा।

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