नई दिल्ली। जंतर-मंतर का दर्जा हटाए जाने के बाद इस फैसले की वैधता पर दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। IYC अध्यक्ष उदय भानु चिब की Delhi HC IYC plea Jantar Mantar पर न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने सुनवाई की। चिब ने दिल्ली पुलिस के 1 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी है। इस आदेश में 1 से 25 अक्टूबर तक जंतर-मंतर पर SIR-विरोधी प्रदर्शन की अनुमति से इनकार किया गया था।
केंद्र की ओर से ASG चेतन शर्मा पेश हुए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर को डिनोटिफाई करने के बाद याचिका निरर्थक हो गई है। पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को नए प्रदर्शन स्थल घोषित किए हैं। इसलिए पुरानी याचिका का कोई औचित्य नहीं बचा।
हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि याचिका निरर्थक नहीं हुई है। नोटिस जारी होना चाहिए। लूथरा ने कहा कि याचिका में संशोधन किया जाएगा। लेकिन मामले की सुनवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने मामले को टाल दिया। दिन में बाद में इस पर विचार होगा। लूथरा व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में बहस करेंगे।
नदीम खान की हिरासत पर Delhi HC IYC plea Jantar Mantar पीठ के सवाल
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से सवाल किए। यह मामला जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले नदीम खान की कथित हिरासत का है। खान का आरोप है कि उन्हें सुबह 9:30 से शाम 5:30 तक नजरबंद रखा गया। शाहीन बाग थाने के पुलिसकर्मियों ने उन्हें जमात-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में रखा। मकसद था कि वे प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।
खान ने इस हिरासत को अवैध और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया। हिरासत के कारण लिखित में नहीं बताए गए। उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष भी पेश नहीं किया गया। उन्होंने पुलिस के निषेधाज्ञा आदेश को भी चुनौती दी है। इस आदेश में नई दिल्ली जिले में पांच से अधिक लोगों के जमावड़े पर रोक है।
बता दें कि हाईकोर्ट ने मंगलवार सुबह ही व्यापारियों की 2,000 करोड़ रुपये के नुकसान वाली याचिका की तत्काल सुनवाई की अनुमति दी थी। NSUI की 10 अक्टूबर के हमले की जांच वाली याचिका पर भी सुनवाई होनी है। जंतर-मंतर पर कानूनी लड़ाई ऐसे समय तेज हुई है, जब CJP कार्यकर्ताओं ने मंगलवार सुबह ही परिसर में घुसकर इसे वापस हासिल करने का दावा किया था।
