मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाली है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत के Solicitor General तुषार मेहता और राज्य के Advocate General प्रशांत सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में हाईकोर्ट के उस फैसले के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें OBC आरक्षण 27 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत करने का आदेश दिया गया था।
दिल्ली में हुई अहम बैठक
मुख्यमंत्री ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुलाकात की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि Solicitor General और Advocate General के साथ OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के कानूनी पहलुओं और आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक सरकार अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है। हालांकि, इसलिए पहले फैसले के विस्तृत आदेश का अध्ययन किया जा रहा है।
राज्य के पंचायती राज मंत्री प्रहलाद पटेल शनिवार को ही कह चुके थे कि सरकार विस्तृत आदेश देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने कहा था कि राज्य अपना पक्ष मजबूती से रखेगा और कानूनी लड़ाई जिम्मेदारी से लड़ेगा। (स्रोत: Lokmat Times)
हाईकोर्ट ने क्या कहा था
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को 159 पन्नों के आदेश में कहा था कि सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करना उचित नहीं ठहराया जा सकता। यह बढ़ा हुआ कोटा 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने लागू किया था। इसके बाद से इस मुद्दे पर लगातार मुकदमेबाजी चल रही थी, जिसमें 90 से ज्यादा याचिकाएं दायर हुईं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 87:13 फॉर्मूले के तहत 29 सितंबर 2022 से अटकी हुई 13 प्रतिशत पदों की भर्ती अब अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों से पूरी की जाए। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट इस आदेश पर रोक लगाता है, तो भर्ती प्रक्रिया फिर से ठहर सकती है।
कांग्रेस भी जाएगी सुप्रीम कोर्ट
इस मुद्दे पर सियासत भी तेज है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घोषणा की है कि कांग्रेस भी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ स्वतंत्र रूप से सुप्रीम कोर्ट जाएगी। उनका कहना है कि पार्टी OBC हितों की रक्षा के लिए लड़ेगी। इस तरह सत्तारूढ़ भाजपा सरकार और कांग्रेस, दोनों ही शीर्ष अदालत में अलग-अलग याचिकाएं दायर करने की तैयारी में हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में कब और किस आधार पर याचिका दायर करती है, और क्या शीर्ष अदालत हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाती है।
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