ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण ट्रक हादसे (Gwalior truck accident) में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, हादसे वाला ट्रक संभवतः Google Maps पर दिखे छोटे रास्ते से मंदिर की ओर पहुंचा था, और मंदिर से पहले ही उसके ब्रेक फेल हो गए थे।
सीएसपी Ravi Bhadoria ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि धान से लदा ट्रक डबरा मंडी से आ रहा था। ड्राइवर इलाके से अनजान थे, इसलिए उन्होंने Google Maps पर लोकेशन देखकर छोटा रास्ता अपनाया होगा। उनके मुताबिक, “मंदिर से पहले ब्रेक फेल हो गए और यह हादसा हो गया।” उन्होंने यह भी कहा कि इस रूट पर पहले कभी भारी वाहन नहीं चले थे।
रविवार तड़के करीब 1:30 बजे हुए इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई और 27 से ज्यादा घायल हुए। ट्रक पंजाब नंबर का था और चिनोर की ओर से आ रहा था। बेकाबू ट्रक श्रद्धालुओं को कुचलता हुआ मंदिर के प्रवेश द्वार से टकरा गया, जिससे गेट की दीवार का एक हिस्सा ढह गया और कई लोग मलबे में दब गए।
प्रतिबंधित रूट पर कैसे पहुंचा ट्रक?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारी वाहनों के लिए प्रतिबंधित रास्ते पर ट्रक पहुंचा कैसे। सीएसपी के अनुसार, रूट पर पार्किंग व्यवस्था, चेकपॉइंट और बैरिकेड लगाए गए थे, फिर भी ट्रक वहां तक पहुंच गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं।
पुलिस अधीक्षक Dharamveer Yadav ने बताया कि शुरुआती जांच में यांत्रिक खराबी (mechanical failure) की आशंका जताई गई है। ट्रक के ड्राइवर Dilbag Singh और मालिक Mohit Singh को गिरफ्तार किया जा चुका है। हादसे में ग्वालियर, शिवपुरी और श्योपुर के श्रद्धालु शिकार हुए।
कार्रवाई और मुआवजा
इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री Dr Mohan Yadav ने CSP झांसी रोड को पद से हटाने और 8 पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के आदेश दिए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है, जबकि राज्य सरकार ने 4-4 लाख रुपये देने का ऐलान किया है।
हादसे में ड्यूटी पर तैनात दो होम गार्ड जवानों की भी जान गई है। मृतकों के परिजन सवाल उठा रहे हैं कि नो-एंट्री जोन में ट्रक घुसा कैसे। पुलिस का कहना है कि वाहन की तकनीकी जांच के आदेश दिए गए हैं और जिम्मेदारी तय करने के लिए विस्तृत जांच जारी है।
