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Gwalior Truck Accident: CSP हटाए गए, 8 पुलिसकर्मी Suspended

Dainik R Times
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ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण ट्रक हादसे में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा एक्शन लिया है। Gwalior truck accident मामले में लापरवाही के आरोप में झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को पद से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही 8 अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के भी आदेश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि घटना में बरती गई लापरवाही को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी तय करके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सीएम ने यह भी कहा कि सभी नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और जनसुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

किन अधिकारियों पर गिरी गाज

निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में तीन थाना प्रभारी शामिल हैं। झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव और आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा को निलंबित किया गया है। झांसी रोड के ट्रैफिक थाना प्रभारी अभिषेक रघुवंशी पर भी गाज गिरी है।

इसके अलावा यातायात निरीक्षक राघवेंद्र जादौन और प्रधान आरक्षक सुशील द्विवेदी निलंबित हुए हैं। आरक्षक किशन खन्ना, अनिल जैतपुरिया व पवन सेंगर को भी निलंबित कर दिया गया है।

यह हादसा शनिवार देर रात करीब 1:30 बजे हुआ था। सप्तमी के मौके पर मंदिर में ग्वालियर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे थे। भीड़ को देखते हुए भारी वाहनों की एंट्री पर रोक थी। इसके बावजूद धान से लदा एक ट्रक चिनोर की ओर से आया और ढलान पर चालक का नियंत्रण बिगड़ गया। ट्रक प्रसाद की दुकानों और श्रद्धालुओं को कुचलता हुआ मंदिर के प्रवेश द्वार से जा टकराया।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि गेट की दीवार का एक हिस्सा ढह गया और कई लोग मलबे में दब गए। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 27 घायल हुए। मृतक और घायल ग्वालियर, शिवपुरी और श्योपुर जिलों के रहने वाले हैं। पुलिस अधीक्षक धर्मवीर यादव के मुताबिक शुरुआती जांच में तकनीकी खराबी की वजह से नियंत्रण बिगड़ने की बात सामने आई है।

इससे पहले पुलिस ड्राइवर दिलबाग सिंह और मालिक मोहित सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया है। गंभीर घायलों को 2 लाख और अन्य घायलों को 50 हजार रुपये दिए जाएंगे। हालांकि बड़ा सवाल अब भी यही है कि प्रतिबंधित रास्ते में भारी ट्रक पहुंचा कैसे। इसी लापरवाही की जांच अब विस्तृत स्तर पर होगी।

(स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स)

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