“वोट चोरी” के आरोपों को लेकर विपक्षी इंडिया ब्लॉक का संघर्ष सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री तक पहुंच गया। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी वाड्रा दोपहर करीब 2:32 बजे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से निकलकर सुप्रीम कोर्ट के लिए रवाना हुए। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक याचिका स्वीकार करने के लिए तैयार थी।
सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 15 सदस्यों के कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को परिसर के भीतर फाइलिंग काउंटर तक जाने की इजाजत दे दी। यह इजाजत हाई-सिक्योरिटी जोन के बाहर स्थित काउंटर तक सीमित रही। इससे पहले सोमवार दोपहर को इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने “मार्च फॉर डेमोक्रेसी” के तहत दिल्ली में प्रदर्शन किया था, जिसमें राहुल गांधी और खरगे ने नेतृत्व किया।
राहुल गांधी ने सोमवार दोपहर की प्रेस वार्ता में कहा था कि इंडिया ब्लॉक करीब 3 बजे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा। इस याचिका में “वोट चोरी” रोकने, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने और सीईसी को हटाने की मांग शामिल है। हालांकि याचिका के औपचारिक रूप से दाखिल होने की पुष्टि अभी किसी मीडिया रिपोर्ट में नहीं हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका: CJI ने मिलने से किया था इनकार
गौरतलब है कि रविवार रात ही मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के अनुरोध को ठुकरा दिया था। सीजेआई ने कहा था कि मामला न्यायालय के विचाराधीन है, इसलिए नेताओं को न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दायर करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसी याचिका की सुनवाई अगले सप्ताह SIR से जुड़े अन्य मामलों के साथ हो सकती है।
इस बीच भाजपा ने विपक्ष के मार्च की तीखी आलोचना की है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि “संविधान में कहां लिखा है कि मुख्य न्यायाधीश को प्रदर्शनकारी जुलूस से मिलना चाहिए?” उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष न्यायिक संस्थाओं में जनता का विश्वास कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी एक्स पर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष चुनावी नतीजों पर चुनिंदा सवाल उठाता है।
उधर केरल विधानसभा ने सोमवार को सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव भी पारित कर दिया है। यह देश में इस तरह का पहला प्रस्ताव है, जिससे इस विवाद को और हवा मिल रही है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पर है कि विपक्ष की याचिका कब औपचारिक रूप से स्वीकार होती है।
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स्रोत: The Times of India
