Krishna Janmashtami: कृष्ण ने किन-किन असुरों का वध किया?

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Krishna Janmashtam

Krishna Janmashtami: कृष्ण ने किन-किन असुरों और प्रमुख शत्रुओं का वध किया?

Krishna Janmashtami 2026 के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा के साथ उनके जीवन से जुड़ी उन घटनाओं को जानना भी दिलचस्प है, जिनमें उन्होंने अलग-अलग असुरों और प्रमुख विरोधियों का सामना किया। श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में कृष्ण के गोकुल और वृंदावन के बाल्यकाल से लेकर मथुरा और बाद के द्वारका काल तक कई ऐसे प्रसंग मिलते हैं।

Contents
Krishna Janmashtami: कृष्ण ने किन-किन असुरों और प्रमुख शत्रुओं का वध किया?पूतना: कृष्ण के शैशव की पहली बड़ी कथाशकटासुर: शकट-भंजन की घटनात्रिणावर्त: बवंडर के रूप में आया असुरवत्सासुर: बछड़े का रूपबकासुर: विशाल पक्षी के रूप में हमलाअघासुर: विशाल अजगर की कथाधेनुकासुर: वध बलराम ने कियाप्रलंबासुर: बलराम का निर्णायक प्रहारअरिष्टासुर: बैल के रूप में आया असुरकेशी: घोड़े के रूप में आया शत्रुव्योमासुर: कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण प्रसंगशंखचूड़: वृंदावन की वन-लीला से जुड़ा प्रसंगमथुरा में कंस से पहले पहलवानों का सामनाकुवलयापीड़ हाथी का सामनाकंस का वधनरकासुर: कृष्ण का बड़ा युद्धशाल्व और सौभ का युद्धदंतवक्र और विदूरथKrishna Asur Vadh की प्रमुख सूचीक्या कृष्ण ने कुल कितने असुरों का वध किया?कृष्ण और बलराम के वधों में अंतरकृष्ण की असुर-वध कथाओं के तीन प्रमुख चरणगोकुल और वृंदावनमथुराद्वारका और बाद का कालKrishna Janmashtami और कृष्ण की वीर कथाएंनिष्कर्ष

पूतना, त्रिणावर्त, वत्सासुर, बकासुर, अघासुर, अरिष्टासुर, केशी और व्योमासुर जैसे असुरों की कथाएं कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी हैं। इसके बाद मथुरा में कंस और उसके पहलवानों से उनका सामना हुआ। आगे चलकर नरकासुर, मुरासुर, शाल्व, दंतवक्र और विदूरथ जैसे प्रमुख विरोधियों की कथाएं भी मिलती हैं।

इन सभी प्रसंगों में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि हर विरोधी का वध कृष्ण ने स्वयं नहीं किया था। धेनुकासुर और प्रलंबासुर का वध बलराम ने किया था, जबकि मथुरा के मल्लयुद्ध में मुष्टिक और कूट का वध भी बलराम ने किया।

पूतना: कृष्ण के शैशव की पहली बड़ी कथा

श्रीमद्भागवत के अनुसार पूतना कंस के पक्ष से गोकुल पहुंची थी। उसने अपना रूप बदलकर शिशु कृष्ण को गोद में लिया और उन्हें विषयुक्त स्तनपान कराने का प्रयास किया।

कथा के अनुसार कृष्ण ने उसका प्राण हर लिया। पूतना का प्रसंग श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के छठे अध्याय में मिलता है।

स्थान: गोकुल
काल: कृष्ण का शैशव
वध करने वाले: कृष्ण

शकटासुर: शकट-भंजन की घटना

कृष्ण के शुरुआती बाल्यकाल में शकट यानी गाड़ी से जुड़ी घटना आती है। कृष्ण ने अपने पैर से उस शकट को उलट दिया।

वैष्णव परंपरा में इस घटना को शकटासुर-वध के रूप में जाना जाता है। मूल प्रसंग को शकट-भंजन के रूप में भी वर्णित किया जाता है।

स्थान: गोकुल
काल: बाल्यकाल
वध करने वाले: कृष्ण

त्रिणावर्त: बवंडर के रूप में आया असुर

त्रिणावर्त बवंडर का रूप लेकर कृष्ण को अपने साथ ऊपर ले गया। कथा के अनुसार कृष्ण का भार बढ़ने लगा और वह उन्हें संभाल नहीं पाया।

इसके बाद कृष्ण ने उसका सामना किया और त्रिणावर्त का अंत हुआ। यह प्रसंग श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के सातवें अध्याय में आता है।

स्थान: गोकुल
वध करने वाले: कृष्ण

वत्सासुर: बछड़े का रूप

वृंदावन में कृष्ण और बलराम के गोचारण से जुड़ी कथाओं में वत्सासुर का प्रसंग आता है। उसने बछड़े का रूप धारण कर कृष्ण और उनके साथियों के बीच प्रवेश किया।

भागवत के अनुसार कृष्ण ने उसकी पहचान कर उसका वध किया।

स्थान: वृंदावन
रूप: बछड़ा
वध करने वाले: कृष्ण

बकासुर: विशाल पक्षी के रूप में हमला

बकासुर विशाल पक्षी के रूप में कृष्ण के सामने आया। उसने कृष्ण पर हमला किया, लेकिन कृष्ण ने उसका सामना किया और उसका अंत कर दिया।

यह घटना भी वृंदावन की बाल लीलाओं से जुड़ी है।

स्थान: वृंदावन
रूप: विशाल पक्षी
वध करने वाले: कृष्ण

अघासुर: विशाल अजगर की कथा

अघासुर को पूतना और बकासुर का भाई बताया गया है। उसने विशाल अजगर का रूप धारण किया और कृष्ण तथा ग्वाल-बालों को अपने भीतर ले जाने की कोशिश की।

श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के 12वें अध्याय में इस घटना का विस्तृत वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार कृष्ण ने अपने दिव्य सामर्थ्य से अघासुर का अंत किया और अपने साथियों को सुरक्षित बाहर निकाला।

स्थान: वृंदावन का वन क्षेत्र
रूप: विशाल अजगर
वध करने वाले: कृष्ण

धेनुकासुर: वध बलराम ने किया

धेनुकासुर को अक्सर कृष्ण की असुर-वध सूची में शामिल कर दिया जाता है, लेकिन भागवत के अनुसार उसका प्रमुख वध बलराम ने किया था

धेनुकासुर गधे के रूप में तालवन में रहता था। कृष्ण और बलराम वहां पहुंचे तो उसने बलराम पर हमला किया। बलराम ने उसे पकड़कर दूर फेंक दिया।

इसके बाद उसके साथी असुरों ने हमला किया और कृष्ण तथा बलराम ने मिलकर उनका सामना किया।

स्थान: तालवन
मुख्य वध करने वाले: बलराम
साथी असुरों से संघर्ष: कृष्ण और बलराम

प्रलंबासुर: बलराम का निर्णायक प्रहार

प्रलंबासुर ने ग्वाल-बाल का रूप धारण कर कृष्ण और बलराम के समूह में प्रवेश किया था। खेल के दौरान वह बलराम को लेकर दूर जाने लगा।

जब उसका वास्तविक रूप सामने आया तो बलराम ने उसका सामना किया और उसका वध किया। यह घटना श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के 18वें अध्याय में आती है।

स्थान: वृंदावन
वध करने वाले: बलराम

अरिष्टासुर: बैल के रूप में आया असुर

अरिष्टासुर बैल का रूप लेकर व्रज पहुंचा। उसके आने से वहां भय का वातावरण बन गया।

कृष्ण ने उसका सामना किया और उसका अंत किया।

स्थान: व्रज
रूप: बैल
वध करने वाले: कृष्ण

केशी: घोड़े के रूप में आया शत्रु

केशी को कंस से जुड़ा शक्तिशाली असुर बताया गया है। उसने घोड़े का रूप धारण कर वृंदावन में प्रवेश किया।

कृष्ण और केशी के बीच संघर्ष हुआ। कथा के अनुसार कृष्ण ने उसके मुंह में अपना हाथ डालकर उसका अंत किया।

स्थान: वृंदावन
रूप: घोड़ा
वध करने वाले: कृष्ण

व्योमासुर: कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण प्रसंग

व्योमासुर कृष्ण की कथाओं में अपेक्षाकृत कम चर्चित नाम है। भागवत के अनुसार उसने ग्वाल-बालों के खेल में प्रवेश किया और उन्हें छिपाने लगा।

कृष्ण ने उसकी चाल पहचान ली और उसका वध किया।

स्थान: वृंदावन क्षेत्र
वध करने वाले: कृष्ण

शंखचूड़: वृंदावन की वन-लीला से जुड़ा प्रसंग

शंखचूड़ का प्रसंग भी कृष्ण की वृंदावन लीला से जुड़ा है। भागवत में कृष्ण द्वारा उसका पीछा करने और उसका वध करने का वर्णन मिलता है।

स्थान: वृंदावन
वध करने वाले: कृष्ण

मथुरा में कंस से पहले पहलवानों का सामना

वृंदावन के बाद कृष्ण और बलराम मथुरा पहुंचे। वहां राजकीय मल्लयुद्ध में कई प्रमुख पहलवान उनके सामने आए।

प्रतिद्वंद्वीवध करने वाले
चाणूरकृष्ण
मुष्टिकबलराम
कूटबलराम
शलकृष्ण
तोशलकृष्ण

श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के 44वें अध्याय में इन मल्लयुद्ध प्रसंगों का वर्णन मिलता है।

कुवलयापीड़ हाथी का सामना

कंस ने कृष्ण और बलराम को रोकने के लिए कुवलयापीड़ नामक हाथी को भी तैनात किया था। मथुरा में प्रवेश से पहले कृष्ण ने उसका सामना किया और उसे परास्त किया।

इसके बाद कृष्ण मल्लयुद्ध के मैदान तक पहुंचे, जहां कंस के प्रमुख पहलवानों से उनका मुकाबला हुआ।

कंस का वध

कृष्ण की कथा में कंस सबसे प्रमुख विरोधियों में से एक है।

मल्लयुद्ध के बाद कंस ने कृष्ण और बलराम के खिलाफ आदेश दिए। कृष्ण ने राजकीय मंच तक पहुंचकर कंस को नीचे गिराया और उसका अंत किया।

स्थान: मथुरा
वध करने वाले: कृष्ण

कंस-वध के साथ कृष्ण के जीवन का एक बड़ा चरण समाप्त हुआ और मथुरा में उनकी भूमिका का नया अध्याय शुरू हुआ।

नरकासुर: कृष्ण का बड़ा युद्ध

द्वारका काल की प्रमुख कथाओं में नरकासुर का प्रसंग आता है। श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के 59वें अध्याय में कृष्ण के नरकासुर के विरुद्ध युद्ध का वर्णन मिलता है।

इस युद्ध में कृष्ण ने पहले मुरासुर का वध किया। इसके बाद मुरासुर के सात पुत्रों से युद्ध हुआ। फिर नरकासुर स्वयं युद्ध में आया और कृष्ण ने उसका वध किया।

नामित प्रमुख विरोधियों के रूप में यहां:

  • मुरासुर
  • मुरासुर के सात पुत्र
  • नरकासुर

का उल्लेख मिलता है।

इस प्रकार इस प्रसंग में 9 नामित प्रमुख विरोधी सामने आते हैं। नरकासुर की पूरी सेना के विनाश का भी वर्णन है, लेकिन उसकी कुल संख्या के आधार पर कृष्ण के सभी वधों की कोई निश्चित संख्या तय नहीं की जा सकती।

शाल्व और सौभ का युद्ध

शाल्व कृष्ण का प्रमुख विरोधी था और उसके पास सौभ नामक विशेष युद्धयान का वर्णन मिलता है।

भागवत में कृष्ण और शाल्व के बीच लंबे युद्ध का वर्णन आता है। कृष्ण ने शाल्व का सामना किया और अंततः उसका वध किया।

वध करने वाले: कृष्ण
संबंधित क्षेत्र: द्वारका

दंतवक्र और विदूरथ

शाल्व के बाद दंतवक्र कृष्ण के सामने आया। भागवत के अनुसार कृष्ण ने अपनी गदा से दंतवक्र का वध किया।

इसके बाद दंतवक्र का भाई विदूरथ कृष्ण पर तलवार और ढाल लेकर हमला करने आया। कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका अंत किया।

दंतवक्र: कृष्ण द्वारा गदा से वध
विदूरथ: कृष्ण द्वारा सुदर्शन चक्र से वध

Krishna Asur Vadh की प्रमुख सूची

नामस्थान/कालवध करने वाले
पूतनागोकुलकृष्ण
शकटासुरगोकुलकृष्ण
त्रिणावर्तगोकुलकृष्ण
वत्सासुरवृंदावनकृष्ण
बकासुरवृंदावनकृष्ण
अघासुरवृंदावनकृष्ण
धेनुकासुरतालवनबलराम
धेनुकासुर के साथीतालवनकृष्ण और बलराम
प्रलंबासुरवृंदावनबलराम
अरिष्टासुरव्रजकृष्ण
केशीवृंदावनकृष्ण
व्योमासुरवृंदावन क्षेत्रकृष्ण
शंखचूड़वृंदावनकृष्ण
कुवलयापीड़मथुराकृष्ण
चाणूरमथुराकृष्ण
मुष्टिकमथुराबलराम
कूटमथुराबलराम
शलमथुराकृष्ण
तोशलमथुराकृष्ण
कंसमथुराकृष्ण
मुरासुरनरकासुर का राज्यकृष्ण
मुरासुर के सात पुत्रनरकासुर का राज्यकृष्ण
नरकासुरनरकासुर का राज्यकृष्ण
शाल्वद्वारका से जुड़ा युद्धकृष्ण
दंतवक्रयुद्धक्षेत्रकृष्ण
विदूरथयुद्धक्षेत्रकृष्ण

क्या कृष्ण ने कुल कितने असुरों का वध किया?

Krishna Asur Vadh के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि श्रीमद्भागवत में कृष्ण द्वारा मारे गए सभी असुरों और विरोधियों की कोई एक निश्चित कुल संख्या नहीं दी गई है।

अलग-अलग अध्यायों में अलग-अलग असुरों, योद्धाओं और सेनाओं का वर्णन मिलता है। कुछ प्रसंगों में कृष्ण अकेले वध करते हैं, जबकि कुछ में बलराम की भूमिका प्रमुख होती है।

नरकासुर के युद्ध में मुरासुर, उसके सात पुत्र और नरकासुर जैसे नामित विरोधियों का उल्लेख मिलता है। इसके अतिरिक्त सेना के विनाश का भी वर्णन है।

इसलिए कृष्ण द्वारा मारे गए असुरों की एक निश्चित consolidated संख्या बताना ग्रंथ के आधार पर संभव नहीं है।

कृष्ण और बलराम के वधों में अंतर

कृष्ण की कथाओं को समझने के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है।

कृष्ण से जुड़े प्रमुख वध: पूतना, त्रिणावर्त, वत्सासुर, बकासुर, अघासुर, अरिष्टासुर, केशी, व्योमासुर, शंखचूड़, कंस, नरकासुर, मुरासुर, शाल्व, दंतवक्र और विदूरथ।

बलराम से जुड़े प्रमुख वध: धेनुकासुर, प्रलंबासुर, मुष्टिक और कूट।

साझा संघर्ष: धेनुकासुर के साथी असुरों के साथ कृष्ण और बलराम दोनों का युद्ध।

कृष्ण की असुर-वध कथाओं के तीन प्रमुख चरण

गोकुल और वृंदावन

पूतना, शकटासुर, त्रिणावर्त, वत्सासुर, बकासुर, अघासुर, अरिष्टासुर, केशी और व्योमासुर जैसे प्रसंग कृष्ण के बाल्यकाल और वृंदावन लीला से जुड़े हैं।

मथुरा

कुवलयापीड़, चाणूर, मुष्टिक, कूट, शल, तोशल और कंस से जुड़े प्रसंग मथुरा काल के हैं।

द्वारका और बाद का काल

मुरासुर, नरकासुर, शाल्व, दंतवक्र और विदूरथ जैसे प्रमुख विरोधियों की कथाएं कृष्ण के बाद के जीवन से जुड़ी हैं।

Krishna Janmashtami और कृष्ण की वीर कथाएं

Krishna Janmashtami केवल कृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि भारतीय धार्मिक परंपरा में यह कृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं को स्मरण करने का अवसर भी माना जाता है।

जन्माष्टमी के दौरान बाल कृष्ण की पूजा, मध्यरात्रि जन्मोत्सव, भजन-कीर्तन और मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाते हैं। इसी अवसर पर कृष्ण के जीवन की विभिन्न कथाओं को भी याद किया जाता है।

कृष्ण के असुर-वध प्रसंगों को धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के संदर्भ में समझना चाहिए। इन कथाओं में धार्मिक विश्वास, प्रतीकात्मकता और पुराणिक साहित्य की अपनी परंपरा शामिल है।

निष्कर्ष

Krishna Janmashtami के अवसर पर कृष्ण की जन्मकथा के साथ उनके जीवन से जुड़ी असुर-वध कथाएं भी विशेष रुचि का विषय रहती हैं।

श्रीमद्भागवत में पूतना से लेकर अघासुर, केशी और कंस तक तथा बाद में नरकासुर, शाल्व, दंतवक्र और विदूरथ जैसे प्रमुख विरोधियों के प्रसंग मिलते हैं।

वहीं धेनुकासुर और प्रलंबासुर जैसे मामलों में बलराम की भूमिका प्रमुख है। मथुरा के मल्लयुद्ध में भी मुष्टिक और कूट का वध बलराम ने किया था।

इसलिए कृष्ण की पूरी कथा को केवल “कृष्ण ने कितने असुर मारे” के आंकड़े से समझना उचित नहीं है। अलग-अलग धार्मिक प्रसंगों में उनके पराक्रम, लीलाओं और प्रमुख संघर्षों का विस्तृत वर्णन मिलता है।

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