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Bangladesh: गारमेंट मजदूरों की हड़ताल, 529 फैक्ट्री बंद

Dainik R Times
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बांग्लादेश में गारमेंट मजदूरों का विरोध प्रदर्शन (Bangladesh Garment Workers Protest) तेज़ हो गया है। सरकार ने रविवार को छह सदस्यीय वेतन बोर्ड बना दिया। इसके बाद भी मजदूर सड़कों पर डटे रहे। वे न्यूनतम वेतन 30,000 टका महीना चाहते हैं। अभी उन्हें 12,500 टका महीना मिलता है।

Bangladesh Garment Workers Protest: वेतन बोर्ड क्या है

श्रम मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने वेतन बोर्ड की घोषणा की। बोर्ड के अध्यक्ष वरिष्ठ जिला न्यायाधीश शेख अशफाकुर रहमान होंगे। इसमें मजदूरों और मालिकों के दो-दो प्रतिनिधि होंगे। एक सरकारी और एक तटस्थ सदस्य भी होगा। बोर्ड बांग्लादेश श्रम कानून के तहत नया न्यूनतम वेतन तय करेगा। मंत्री ने मजदूरों से काम पर लौटने की अपील की।

मजदूरों का कहना है कि खाने, रहने, आने-जाने और इलाज का खर्च बहुत बढ़ गया है। इसलिए 12,500 टका में गुजारा मुश्किल है। वे 30,000 टका महीना चाहते हैं। यह रकम मौजूदा वेतन से दोगुनी से भी ज्यादा है।

ढाका और गाजीपुर में झड़पें, फैक्ट्रियां बंद

ढाका में सैकड़ों मजदूरों ने मीरपुर-10 चौराहे को सुबह 9 बजे से जाम कर दिया। गाजीपुर में ढाका-तांगेल राजमार्ग भी बंद रहा। पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों से भीड़ को हटाया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर ईंटें फेंकी। एक पुलिस चौकी और एक पुलिस वाहन को आग लगा दी गई।

बांग्लादेश गारमेंट निर्माता संघ के अनुसार देशभर में 529 फैक्ट्रियां बंद हुईं। इससे 9,87,190 मजदूर काम से बाहर हो गए। गाजीपुर में अकेले 45 फैक्ट्रियों में छुट्टी घोषित हुई। वहां की औद्योगिक पुलिस के अनुसार 25 से 30 फैक्ट्रियां बंद हुईं। सुरक्षा के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश की पांच टुकड़ियां 7 नवंबर तक तैनात रहेंगी।

शनिवार को आशुलिया में भी प्रदर्शन हुए थे। वहां दर्जनों फैक्ट्रियों में काम रुक गया था। कपड़ा उद्योग बांग्लादेश का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र है। इसलिए इस हड़ताल का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फ्रांस और जर्मनी में भी महंगाई के खिलाफ हाल में बड़े प्रदर्शन हुए थे। यूरोप में युवाओं के विरोध प्रदर्शन भी इसी महंगाई के मुद्दे पर हुए थे। रॉयटर्स के अनुसार सरकार ने बोर्ड का काम तुरंत शुरू करने का भरोसा दिया है।

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