दीवाली पर मध्य प्रदेश में बिजली संकट का खतरा टल गया है। MP Electricity Workers के 45 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों ने काम बंद आंदोलन स्थगित कर दिया है। यह आंदोलन 7 और 8 नवंबर को होना था। ऊर्जा सचिव के साथ सकारात्मक बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। अब दीवाली पर बिजली व्यवस्था सामान्य रूप से चलेगी।
प्रदेश की छह बिजली कंपनियों में करीब 45 हजार आउटसोर्स कर्मचारी काम करते हैं। इन कर्मचारियों ने 4 नवंबर को हुई बैठक में चेतावनी दी थी। उन्होंने 7 और 8 नवंबर को काम बंद करने की बात कही थी। उनकी 34 मांगों पर प्रबंधन से बातचीत चल रही थी। शुक्रवार शाम को संगठन ने आंदोलन टालने की घोषणा की।
संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव ने कहा कि ऊर्जा सचिव से बातचीत सकारात्मक रही। महामंत्री दिनेश सिसोदिया और जनता यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेंद्र भदौरिया ने भी फैसले की घोषणा की। मध्य क्षेत्र बिजली प्रशासन से भोपाल में बातचीत हो चुकी है। पावर ट्रांसमिशन कंपनी से जबलपुर में भी चर्चा पूरी हुई है।
MP Electricity Workers: 34 मांगों पर बातचीत जारी
कर्मचारियों की मुख्य मांगों में ठेका प्रथा खत्म करना शामिल है। वे पंजाब की तर्ज पर आउटसोर्स कर्मचारी विधेयक लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वेतन में बढ़ोतरी और नियमितीकरण की मांग भी है। दुर्घटना मुआवजा चार लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने की मांग भी सूची में है।
संगठन का आरोप है कि करीब 90 प्रतिशत कर्मचारियों को त्योहारों पर अतिरिक्त काम का पारिश्रमिक नहीं मिला। कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से दीवाली और राष्ट्रीय त्योहारों पर भी ड्यूटी करते आ रहे हैं। शेष चार बिजली कंपनियों से दीवाली के बाद बातचीत प्रस्तावित है। संगठन ने कहा कि बातचीत से समाधान की उम्मीद है।
आंदोलन टलने के बाद कर्मचारी दीवाली पर भी बिजली व्यवस्था संभालेंगे। वे संचालन, संधारण और रखरखाव का काम जारी रखेंगे। इससे त्योहार के दौरान बिजली गुल होने पर भी तुरंत सुधार हो सकेगा। प्रदेश में दीवाली की तैयारियां जोरों पर हैं और बिजली की मांग बढ़ी हुई है।
शिक्षकों और सफाई कर्मचारियों को भी मिली राहत
मध्य प्रदेश में इस हफ्ते कर्मचारियों से जुड़ी कई खबरें आई हैं। हाई कोर्ट ने 99 हजार शिक्षकों को पुरानी पेंशन देने का फैसला सुनाया है। इसके अलावा भोपाल में सफाई कर्मचारी भी हड़ताल के बाद काम पर लौट आए हैं। बिजली कर्मचारियों का फैसला भी इसी कड़ी में एक सकारात्मक खबर है।
दीवाली के दौरान बिजली की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। घरों और बाजारों में रोशनी के लिए अधिक बिजली चाहिए होती है। ऐसे में कर्मचारियों का काम पर रहना बड़ी राहत है। संगठन ने कहा कि बातचीत के बाद ही आगे की रणनीति तय होगी।
