अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के बाद क्यूबा की बारी आएगी। उन्होंने यह बात फ्लोरिडा में मध्यावधि चुनाव के प्रचार कार्यक्रम के दौरान कही। ट्रंप के इस बयान के बाद क्यूबा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
ट्रंप ने कहा कि मध्य पूर्व से लौटते समय अमेरिकी युद्धपोत क्यूबा के तट के पास रुक सकते हैं। उन्होंने कहा, “हम ईरान से लौटते समय क्यूबा का भी ध्यान रखेंगे। वे खूबसूरत जहाज क्यूबा से होकर गुजरेंगे। उनमें से एक तट से करीब 50 गज की दूरी पर रुकेगा। इसके बाद हम मार्को रुबियो को भेजेंगे।”
Rubio की CIA वाली अपील
इसी दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी क्यूबा को लेकर एक संदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जो लोग क्यूबा में सकारात्मक बदलाव चाहते हैं, उनके लिए यही सही समय है। रुबियो ने ऐसे लोगों से केंद्रीय खुफिया एजेंसी के साथ discreet साझेदारी करने की अपील की। उन्होंने भ्रष्टाचार, टूटे वादों और कुछ चुनिंदा लोगों के विशेषाधिकारों का हवाला दिया।
रुबियो क्यूबा नीति का बड़ा हिस्सा संभाल रहे हैं। ट्रंप प्रशासन पहले ही कह चुका है कि उसका लक्ष्य क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को बदलना है। हाल के महीनों में अमेरिका ने क्यूबा की 9 सरकारी कंपनियों पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। ये कंपनियां निर्माण, खनन और धातु क्षेत्रों से जुड़ी हैं।
Havana का तीखा जवाब
क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने ट्रंप के बयान को खारिज कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि क्यूबा अमेरिका की महत्वाकांक्षाओं से जुड़ी हर धमकी को खारिज करता है। उन्होंने कहा कि क्यूबा का तट खूबसूरत समुद्र तटों से भरा है, लेकिन वहां नुकीली चूना-पत्थर की चट्टानें भी हैं। ये चट्टानें शत्रुतापूर्ण इरादों से आने वालों के लिए अनुकूल नहीं हैं।
क्यूबा पर अमेरिका का प्रतिबंध 60 साल से ज्यादा समय से जारी है। इस साल की शुरुआत में लगाई गई तेल नाकाबंदी ने क्यूबा को गंभीर संकट में डाल दिया है। ईंधन की कमी और बिजली कटौती से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकार विशेषज्ञों ने भी इस नाकाबंदी की आलोचना की है।
ट्रंप पहले भी क्यूबा को लेकर ऐसे बयान दे चुके हैं। इसी साल 2 मई को उन्होंने कहा था कि अमेरिका लगभग तुरंत क्यूबा पर कब्जा कर लेगा। हालांकि, बाद में उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों देशों के बीच समझौता हो सकता है और सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी।
फिलहाल ट्रंप के ताजा बयान से यह साफ है कि क्यूबा अमेरिका की विदेश नीति में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। Havana की प्रतिक्रिया से यह भी साफ है कि वह किसी भी दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं है।
